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श |
ष |
स |
ह |
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त्र |
कक्षकषनलभप
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| क्षमता
निर्माण; क्षमता विकास: |
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| बढ़ाव
या विकास कि शक्ति का उत्पन्न
कहा से हुआ यह निर्धारित करता
है कि क्षमता विकास और क्षमता
निर्माण मे क्या फर्क है. |
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|
"क्षमता
निर्माण" सूचित करता है के समाज
या संगठन के बाहर का कोई यन्त्रित्व
क्षमता बढाने के लिये शक्ति
उपलब्ध कराता है. |
....
| इसका
विचार आता है "सामाजिक
इंजीनियरिंग" के मनोभाव से. |
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|
इसके
विरुद्ध "क्षमता विकास," सूचित
करत है के समाज या संगठन बढ़ाव
के लिये शक्ति खुद समाज या संगठन
के अंदर से आती है. |
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| समाज
(या संगठन) का अधिकारिकरण वृद्धि
होता है , उसकि शक्ति
मे, उसकि अपने लक्ष्य को पाने
कि क्षमता (सामर्थ्य)
मे सुधार. |
. |
क्षमता
विकास कि तरह यह भी एक प्रक्रम
है ज्यादा शक्तिशाली बनने का.
देखिये "अधिकारिकरण
का मापन" - एक लिस्ट के लिये जिसमे
सामर्थ्य और क्षमता के १६ तत्व
है और इनकी वृद्धि मापन के लिये
हिस्सेदारी पद्धति है. |
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| अधिकारिकरण
कार्य-प्रणाली का लक्ष्य परोपकार
दृष्टिकोण के विप्रीत, समाज
को बलवान होना सिखाती है नाकि
उसको बाहार के संसाधनो पर निर्भर
रेहना. |
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इस
कारण से अधिकारिकरण कार्य-प्रणाली
समाज के लिये काम आसान नहि बनाती,
क्योकि यह प्रणाली के अनुसार
संघर्ष और प्रतिरोध एक शारीरिक
परिश्रम कि तरह ज्यादा शक्ति
पैदा करते है. देखिये समाजिक
अधिकारिकरण. |
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देखिये
जिहाद
एक दिलचस्प उपमा कि लिये.
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| अधिकारिकरण
कार्य-प्रणाली: |
..
| यहा
बनाये गये परिक्षण संसाधनो का
लक्ष्य है गरीबी पर समाजिक स्तर
पर आक्रमण करना, जहा समाज सेवा
औरे प्रबंधक परिक्षण देने का
उद्देश्य है कम आमदनी वाले समूहो
को ज्यादा अधिकार देना. इन
कुशलताओ और तकनीको के पीछे समाज
शास्त्रीय सिद्धांत है. |
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|
एक
सफल समाज सेवक जो एक व्यावहारिक
शास्त्र का ज्ञाता भी होता है,
सर्वोत्तम कार्य तब ही कर सकता
है जब वह इन कुशलताओ और प्रोग्राम
के पीछे के मूल सिद्धान्तो से
परिचित हो. |
....
यह
काफि सारे महत्वपूर्ण सिद्धान्तो
को जोड कर बना है:
१. जबकि
सहायता दी जा सकती है, यह सहायता
परोपकारी नहि होनी चाहिये जो
निर्भरता और कमज़ोरी को बढ़ावा
दे, मगर जो साझेदारी, सहयोग और
परिक्षण के द्वारा आत्मनिर्भरता
और वर्धित क्षमता को बढ़ावा दे;
२. प्राप्तकर्ता
संगठन या समाज को नियंत्रण मे
नहि रखना चहिये और उन्हे बदलने
पर मजबूर भी नहि करना चाहिये,
जो लोगो ने समाज सेवा मे परिक्षण
प्राप्त किया है उनको उत्तेजन,
सूचना और मार्गदर्शन के साथ
बीच बचाव करना चहिये;
३. जीवधारी
परिश्रम, संघर्ष और विपत्ति
का समाना करके बलवान बनते है.
अधिकारिकरण कार्य-प्रणाली इस
ही सिद्धान्त को सामाजिक संगठन
मे संयुक्त करती है;
४. पानेवालो
कि हिस्सेदारी क्षमता को बढाने
मे बहुत जरुरी है, ख़ास तौर पर
निर्णय सृजन मे;
५. हमे
शुरू से ध्यान रखना होगा के हिस्सेदार
पुरा नियंत्रण ले, पुरे निर्णय
सृजन का प्रयोग करें और सम्पूर्ण
जिम्मेदारी ले उन कार्यो कि
जो शक्ति को बढावा देंगी.
यह अधिकारिकरण
कार्य-प्रणाली के सिद्धान्तो
का सारभाग है. |
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| शब्द"निरंतरता",
विकास सहायता के लिये जरुरी
है. (यह शब्द ज्यादातर शब्दकोशो
मे नहि मिलता). इसका संदर्भ है
बाहरी सहारे के ना रेहने के बाद
किसी चीज़ को "निरंतर रखने" (जारी
रखने) की "क्षमता" से. जो समाज पानी
की आपूर्ति के साधन को बनाता
है, वह उसे बनाने के बाद चला सके,
साफ रख सके और उसकि मरम्मत कर
सके यह लक्ष्य है. |
.. |
बहारी
दाता के लिये इसका मतलब है, परियोजना
का चलते रेहना या फिर जब वह मदद
बंद कर दे उसके बाद परियोजना
का निग्रम. एक समाज सेवक के तौर
पे आपके लिये इसका अर्थ है समाज
के सामाजिक प्रक्रम का बलवान
होते रेहना, आपके जाने के बाद
भी. पर्यावरण और पारिस्थितिकी
से जुडे लोगो के लिये निरंतरता
के लिये जरुरी है ऐसे कार्य जो
भौतिक पर्यावरण (जैसे कि जैविक)
के द्वारा सिद्ध करे जा सकें,
जिनमे ऐसे संसाधन ना इस्तमाल
हो जिन का नवीकरणीय होना मुमकिन
नहि है. |
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| लोकतन्त्र
का अंग्रेज़ी शब्द "democracy,"
आता है प्राचीन यूनानी भाषा
से, जहा "demo" का मतलब है
लोग (जैसे के demography मे)
और "cracy" का अर्थ है शक्ति
(जैसे के bureaucracy या aristocracy
मे). |
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|
अंगेजी
शब्द "democracy", का अर्थ है
लोगो कि शक्ति. यह विडम्बना कि
बात है कि प्राचीन ग्रीस बहुत
लोकतान्त्रिक नहि था मगर उनकी
अर्थव्यवस्था कि गुलामो कि मजदूरी
पर आधारित थी. |
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| प्रजातंत
अलग अलग प्रकार के होते हैः जैसे
के प्रतिनिधित्व प्रजातंत जहा
लोग अपने प्रतिनिधियो का चुनाव
करते है (जैसे के पार्लियामेन्ट
के सभ्य) और फिर यह प्रतिनिधि
उनके लिये निर्णय लेते है, और
हिस्सेदारी प्रजातंत जहा लोग
निर्णय लेने मे हिस्सेदार होते
है. |
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एक
समाज सेवक के तौर पे आपको प्रोत्साहन
दिया जाता है कि आप समाजिक परियोजनाओ
मे प्रजातंत को बढ़ावा दें, मगर
यह ज्ररूरी नहि है कि आप कोई और
देश कि पार्लियामेन्ट वयवस्था
कि नकल करें. आपके समाजिक तौरपे
जो योग्य है उसका पालन करें. |
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|
एक
प्रक्रम सामाजिक परिवर्तन के
लिये जो राजनीतिक निर्णय लेने
मे लोगो के अधिक अधिकार को बढावा
देता है.
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| "भागीदारी"
एक ऐसा रिश्ता है जिसमे जो पक्षो
के बीच सम्मति है उनमे कुछ हद्द
तक बराबरी होती है. पहले समझाए
गए मुख्य शब्द "स्वतंत्र" मे बताया
गया था कि हम सब कुछ हद्द तक अन्योन्याश्रित
है. जबकि आपका काम समाज को निर्भरता
से दूर लेजाने का है, वह पूरी
तरह से स्वतंत्र नहि हो सकता. |
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तो
फिर समाज का यथार्थ लक्ष्य होना
चहिये नगरपालिका या ज़िला केअधिकारियो
के साथ भागीदारी करना ताकि वह
एक ज्यादा बराबर के रिश्ते कि
तरफ बढ सके. |
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| "सहभागिता
शब्द का उपयोग इस वेबसाईट पर
अलग अलग तरह से किया गया है. "समाजिक
सहभागिता" का अर्थ है के समाज
के सभी सदस्य समाज पे असर होने
वाले निर्णयो के सृजन मे हिस्सा
लेते है (नाकि सिर्फ परामर्श
देते है या सहायक होते है).
देखिय PAR. और
र्देखिये
नागरिक नियुक्ति. |
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"सहभागी
परिक्षण" का अर्थ है कार्य
को कर के सिखना, यानि के कार्य
मे हिस्सा लेना प्रभावशाली तरिका
है कार्य कि कुशलताओ को सिखने
के लिये. हिस्सेदार जब किसी व्याख्यान
या प्रस्तुति को सुनते या देखते
है तो वह उतना प्रभावशाली नहि
होता. "सहभागी परिक्षण"
का अर्थ है कि प्रबंधन केवल प्रबंधको
का काम नहि है किन्तु हर एक का
कार्य है. "सहभागी समीक्षा"
(PRA)
का यह भी अर्थ है कि समाज या संगठन
अपनी स्थिति का मूल्यांकन करने
के लिये औरे कौनसी जरुरते प्राथमिकता
रखती है यह निर्धारित करने के
लिये उसका हुआ है. |
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| पारदर्शीता
समाज को बलवान बनाने का एक बहुत
मुख्य तत्व है (देखिये अधिकारिकरण
के तत्व ). "पारदर्शी" शब्द का
यहा अर्थ है किसी चीज़ के आरपार
देखने कि क्षमता. |
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जब
सरकारी कर्मचारी कार्य (जैसे
के निर्णय लेना, संसाधन बांटना)
मे गोपनीयता रखने कि कोशिश करते
है, अपने कार्यो को लोगो से छुपाने
कि कोशिश करते है तो वह पारदर्शी
नहि हो रहे. वह लोगो से "कुकुरमुत्ता
बरताव" कर रहे है. |
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| यह
सन्देह, उदासीनता और पार्श्वीकरण
को बढ़ावा देता है (जो गरीबी
और
समाजिक कमज़ोरी के महत्वपूर्ण
कारण है). एक समाज सेवक के तौर
पे आपका काम है पारदर्शीता को
बढावा देना. यह आप कर सकते है
लोगो को पारदर्शीता के बरे मे
समझा के, उनको याद दिला के, के
उनका हक्क और ज़िम्मेदारी है
यह जानना के क्या हो रहा है. (अभिज्ञता
बढ़ाना). |
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आप
पारदर्शीता को समाजिक संगठन
का मुख्य तत्व बना कर भी इसे बढावा
दे सकतें है. आपके देश मे "अनेक
कानून" होंगे जो आश्वस्त करते
है कि जनता यह जाने कि सरकार पैसा
कहा खर्च कर रहि है, यह सूचना
सार्वजनिक अभिलेखो मे लोगो को
उपलब्ध होनी चाहिये. यह सूचना
कि उपलब्धी का मुख्य कारण है
सरकारी पारदर्शीता, मगर कुछ
अधिकारी इस मकसद को उलटने कि
कोशिश करते है. |
...
| अगर
आप कोई समस्या को छुपाने, दबाने
कि या नकारने कि कोशिश करेगें
तो आप उसके उपाय मे अड़च डाल रहें
है. |
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इससे
विप्रीत, अगर आप समस्या को सामने
लाये, उसे स्वीकारें, औरे ईमानदारी
से उस्का निरीक्षण करें तो आप
समाधान के ज़्यादा करीब होंगे.
पारदर्शीता शक्ति प्रदान करती
है. |
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