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| समाज
(या संगठन) का अधिकारिकरण वृद्धि
होता है , उसकि शक्ति
मे, उसकि अपने लक्ष्य को पाने
कि क्षमता (सामर्थ्य)
मे सुधार. |
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क्षमता
विकास कि तरह यह भी एक प्रक्रम
है ज्यादा शक्तिशाली बनने का.
देखिये "अधिकारिकरण
का मापन" - एक लिस्ट के लिये जिसमे
सामर्थ्य और क्षमता के १६ तत्व
है और इनकी वृद्धि मापन के लिये
हिस्सेदारी पद्धति है. |
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| अधिकारिकरण
कार्य-प्रणाली का लक्ष्य परोपकार
दृष्टिकोण के विप्रीत, समाज
को बलवान होना सिखाती है नाकि
उसको बाहार के संसाधनो पर निर्भर
रेहना. |
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इस
कारण से अधिकारिकरण कार्य-प्रणाली
समाज के लिये काम आसान नहि बनाती,
क्योकि यह प्रणाली के अनुसार
संघर्ष और प्रतिरोध एक शारीरिक
परिश्रम कि तरह ज्यादा शक्ति
पैदा करते है. देखिये समाजिक
अधिकारिकरण. |
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देखिये
जिहाद
एक दिलचस्प उपमा कि लिये.
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