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| "भागीदारी"
एक ऐसा रिश्ता है जिसमे जो पक्षो
के बीच सम्मति है उनमे कुछ हद्द
तक बराबरी होती है. पहले समझाए
गए मुख्य शब्द "स्वतंत्र" मे बताया
गया था कि हम सब कुछ हद्द तक अन्योन्याश्रित
है. जबकि आपका काम समाज को निर्भरता
से दूर लेजाने का है, वह पूरी
तरह से स्वतंत्र नहि हो सकता. |
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तो
फिर समाज का यथार्थ लक्ष्य होना
चहिये नगरपालिका या ज़िला केअधिकारियो
के साथ भागीदारी करना ताकि वह
एक ज्यादा बराबर के रिश्ते कि
तरफ बढ सके. |
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