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.निर्देशप्रलेख.
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| पहले
"धन-सम्पत्ति
उत्पादन कि हेन्ड्बूक," मे आपने
देखा के धन-सम्पत्ति खर्च हो
सकती है, जमा (बचाई) जा सकती
है या निवेश की जा सकती है. धन-सम्पत्ति
की रचना या उत्पादन मे मुख्य
बात है एक विधि जो बदल सकें "बचत"
को
"निवेश
मे." |
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यह
प्रलेख बचत कि प्रकृति को देखता
है, और आप एक समाज सेवक के तौर
पर अपने लक्ष्य समूह (हिताधिकारी)
को उत्साहित करे औरे उनको मार्गदर्शन
दें. |
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| "बचत"
का
मतलब है, नकद या भौतिक उत्पादो
को भविष्य के लिये अलग से रखना.
देहात मे रेहने वाले और कम आमदनी
वाले समाज गरीब होने के बावजूद
बचत कर सकते है, अगर उनको मर्गदर्शन
और प्रोतसाहन दिया जाय. |
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देहाती
समाज मे लोग पारंपरिक जमा घूर्णन
समूहो के द्वारा या फिर पालतू
जानवरो (बकरी, गाय , भैस या मुर्गी)
की खरीदी के द्वारा बचत करते
है . |
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| हर
सूक्ष्म उद्यम मे मूलधन या निधि
डालने कि जरुरत होती है, जो या
तो मालिक के अपने पैसे से आता
है या फिर उधार लेने से आता है.
जब उधार लिया जाता है तो यह पैसा
किसी और कि बचत का होता है. |
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अन्य
कारोबारो कि तरह सूक्ष्म उद्यम
भी बचत (मालिक कि या किसी और
कि ) को निवेश मे बदल कर सम्पत्ति
मे परिवर्तित करते है. |
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लोग
अलग अलग करणो के लिये बचत करते
है (आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक,
सांस्कृतिक).
लोगो
कि बचत करने कि क्षमता निर्भर
करती है:
-
कमाई;
-
खपत
आदतें;
-
सामाजिक-सांस्कृतिक
दायित्व;
-
व्यक्तिगत
अभिलाषा; और
-
आसपास
के हालात.
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लोग
बचत निचे दिये हुए कारणो कि वजह
से करते हैः
-
कोई
धंधा शुरू करने के लिये या चल
रहे धंधे को आगे बढाने के लिये;
-
अपने
बढते परिवार कि जरुरतो के लिये
- परिवार के स्वास्थ्य, शिक्षा
(स्कूल
कि फीस)
और
घर के लिये (घर के निर्माण के
लिये);
-
नये
उपकरण खरीदने के लिये;
-
बुढापे
के लिय जुटाने के लिये;
-
अनदेखी
परिस्थितियो के लिये (जैसे
सूखा जिसकि वजह से फसल ना हो);
-
भैतिक
संपत्ती जैसे के ज़मीन खरीदने
के लिये; और
-
ऋण
दात्री संस्थाये जो ऋण दे सकति
है उनसे रिश्तेदारी बनाने के
लिये.
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कम
आमदनि वाले समाजो मे बचत करने
कि क्षमता कम होति है
और
ज्यादतर बचत नकद या कोई और चीजो
मे होति है.
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नकद
मे बचत करना ससता और
सुविधाजनक
होता है.
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...
और
चीजे जो बचत के तौर पर देखीं जाति
है (जैसे के खाद्य जो लम्बे समय
के लिये रखें जा सकते) इनमे
शामिल है:
-
अनाज
(गेहूँ,
बाजरा, जुवार, धान, दाल, तिल, मूँगफली);
-
पशुधन
(जैसे
कि गाय, भैस, भेड-बकरी, मुर्गीया);
और
-
संसाधित
खाद्य (जैसे कि आटा, मसाले, तेल,
घी).
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| कम
आमदनि वाले समाजो मे ज्यादातर
लोग बचत गुप्त जगहो मे करते है.
जैसे कि छत पर, दिवारो मे, बर्तनो
मे, खपरैल के निचे या बिस्तर के
नीचे. इन जगहो मे कि गई बचत को
निवेश मेघि बदला जा सकता. |
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एक
समाज सेवक के तौर पर आपका काम
है उन्को प्रोतसाहन देना घूर्णन
जमा समूह मे बचत करेने के लिये
(जो
परंपरागत पद्धतियो से पैदा हुई
है और जो मदद करे सुक्ष्म उद्यम
के निर्माण और विकास मे योगदान
मिल सकें और उससे धन का निर्माण
हो और गरीबी घटे). |
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| चाहे
को इन्सान कितना भी गरीब हो, जैसे
उनकि आमदनी उपर दिये गये करणो
के वजह से बढे, उनहे बचत करने
के लिये उकसाना चाहिये और प्रोत्साहन
देना चाहिये. |
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सदस्यो
को समय-समय पर (साप्ताहिक, माहवारी
या कोई एक निश्चित दिन पर) अपने
समूह के साथ बचत करनी चाहिये. |
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समूह
बचत को समाज सेवक सफलतापूर्वक
चला सकते है निचे दि हुई सरल प्रक्रिया
का पालन करने सेः
-
समूह
को निश्चय करना होगा कि हर सदस्य
कितनी बचत करेगा;
-
एक
खास दिन जिस पर बचत कि रकम दी
जाय उस पर सहमती होनी चाहिये
ताकि नियमित बचत हो सके;
-
हर
सदस्य को जमा किताब दि जानी चाहिये
जिसमे समूह के अफसर जमा कि गई
रकम को दर्ज करे;
-
समूह
को एक समूह बचत खाता खोलना चाहिये
जिसमे सब सदस्यो कि बचतो को जमा
किया जाय;
-
समूह
को एक सामान्य रजिस्टर रखना
चाहिये जिसमे हर सदस्य से लिया
गया पैसा जमा खाते मे दालने से
पेहले रिकोर्ड किया जाय. इस रजिस्टर
कि जानकारी हर सदस्य कि व्यक्तिगत
जमा किताब कि जानकारी से मेल
खानी चाहिये;
-
सारी
बचत रकम को समूह कि सभाओ मे हि
एकत्र करनी चाहिये ताकि जवाबदेही
और पारदर्शीता हो; और
-
कुल
रकम जो जमा कि गई है उसे सभा मे
घोषित करना चाहिये और उसका रेकोर्ड
रखना चाहिये, उसके बाद यह रकम
खजांची को बेंक मे जमा करने के
लिये दे देनी चाहिये.
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