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समाज
की योजना कार्य-प्रणाली तैयार
करना (CAP)
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समाज
खुद ही अपना भविष्य तय करता है
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प्रशिक्षण
लेख.
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जो चाहिये
उसका निश्चय करना, जो उपलब्ध
है खयाल में रखना, और ज़रूरतों
को पाने के तरीकों को समझना--
यही आधार हैं योजना पूर्ति के
लिये.
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प्रशिक्षण
के समय, और समाज एवं उसके अधिकारियों
को और समर्थ बनने के लिये प्रोत्साहन
देते समय (स्वाव्लम्बन के लिये),
उन्हें
सुव्यवस्था और सही योजना बनाने
का महत्व जताना ज़रूरी है
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| योजना
बनाते समय, सबसे पहले ज़रूरी है
- लक्ष्य-द्रिष्टि "हम कहां पहुंचना
चाहते हैं?" जैसे प्रख्यात लेखक
लुइ कैरल ने अपनी पुस्तक "Alice in
Wonderland" में लिखा था: "अगर तुम्हे
तय ही नही है कि कहां जाना है,
तो कोई भी राह चलेगी." |
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बहुत
आवश्यक है की पूरी संस्था की
लक्ष्य-द्रिष्टि एक हो. समाज
सेवक के रूप में आपका कार्य इसे
सम्भव करना है |
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सुव्यवस्था
के तत्व (देखिये: चार)
्चार
प्रशनों में छिपे हैं
-
"हम
क्या चाहते हैं?"
-
"हमारे
पास क्या है?"
-
"जो
हमारे पास है उसका उपयोग कैसे
करें कि जो चाहते हैं वह मिल सके?"
और
-
"जब
लक्ष्य मिल जायेगा तो क्या होगा?"
सामूहिक
निरीक्षन से दूसरे प्रश्न का
उत्तर मिलेगा. |
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| तीसरे
और चौथे सवालों के उत्तर के लिये
समाज को पूरी योजना कार्य-प्रणाली
बनानी चाहिये (CAP). |
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यह
योजना कार्य-क्रम एक वर्षीय.
पंच वर्षीय, या फिर किसी भी ऐसे
समय का हो सकता है जो कि जिला
की अन्य योजनाओं से संगत हो |
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इस
योजना कार्य-प्रणाली से मालूम
होना चाहिये
-
समाज
की स्थिति अभी कैसी है;
-
योजना
के अन्त तक वह कैसी होनी चाहिये;
और
-
किस
तरह यह लक्ष्य प्राप्त होगा
इसके
लिये किसी भी अन्य सामाजिक योजनाओं
का भी संदर्भ लिया जा सकता है
जैसे |
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| योजना
कार्य-क्रम का पहला अनुकरण (copy)
अधिकारियों द्वारा तैयार किया
जाना चाहिये. समाज के प्रथम निरीक्षण
की सामुहिक चर्चा के समय जो विचार
प्रकट किये जाते है वह इसका आधार
होते हैं. इस योजना कार्य-क्रम
को फिर सब के सामने प्रस्तुत
किया जाता है, चर्चा होती है,
सुधार किया जाता है, और सबकी सहमति
ली जाती है |
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याद
रहे, समाज सेवक की भूमिका में
आपका कार्य सिर्फ़ इस प्रक्रिया
को सुगम करना है. अधिकारियों
को ही योजना सबके सामने रखनी
चाहिये. और उसकी सहमति एकमत रूप
से पूरे समूह से आनी चाहिये. |
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