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मिल
कर समीक्षा करने की क्रिया को
सुगम करना
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समाज
को स्वयं की जांच अथवा समीक्षा
के लिये प्रेरित करना
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सहायक
के लिये नोटस
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एक
समाज सेवक की भूमिका में आप क्या
करते हैं जिससे समाज में साथ
मिल कर काम करने की भावना पैदा
हो, साथ मिल कर लोग जांचें कि
उन्हें किन साधनों की ज़रूरत
है ?
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| समाज
में मिल कर काम करने का महत्व: |
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| किसी
भी समाज में सामर्थ्य बढ़ाने
के लिये सबसे पहले ज़रूरी है कि
सभी सदस्य मिल कर अपनी परख खुद
करें, कि उनके पास क्या साधन हैं
और उनकी क्या ज़रूरते हैं. |
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इस
कार्य को सफ़ल करने में आपकी भूमिका
बहुत महत्वपूर्ण है. |
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| जब
तक सदस्य सही भांति और एकमत हो
कर अपने हालात को जांच न लें,
और अपनी दुविधाओं, अपनी ज़रूरतों,
साधनों, और कमज़ोरियों को समझ
न लें तब तक वह एकमत रूप से अपनी
किसी भी समस्या के समाधान नही
निकाल सकेंगे और न ही अपनी गरीबी
दूर कर सकेंगे. |
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देखिये
एकता
के लिये संयोजन. |
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| इसीलिये
एक समाजसेवक के रूप में आपका
कार्य समाज की प्रगति के लिये
अति महत्वपूर्ण है, और साथ मिल
कर समीक्षा करने की क्रिया को
सुगम करना समाज की प्रगति के
लिये बहुत ही आवश्यक अंग है. |
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देखिये
सह-सम्मत समीक्षा और अनुसंधान
पर लेख (इस भाग का मुख्य अंग)
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिये.
इसमें विस्तार से इस क्रिया
का उपयोग समाज की प्रगति और समस्याओं
के समाधान के संदर्भ में किया
गया है. |
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| आपका
अनुभव ही सबसे श्रेष्ठ गुरु
है. |
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अगर
आपको किसी अनुभवी PRA या PAR के समर्थक
के साथ काम करने का अवसर मिले
तो यह आपके लिये बहुत उपयोगी
होगा. |
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| अगर
नहीं भी हो तो इस विषय पर आप जितना
संभव हो पढे़, खुद मिल कर समीक्षा
करवाने की कोशिश करें, और दूसरे
समाजसेवकों के साथ अपने अनुभव
और निष्कर्ष बांटें. |
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एक
अच्छे समाज सेवक की शिक्षा कभी
समाप्त नही होती. |
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| इस
अंश में आपको क्या पढ़्ना चाहिये? |
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इस
साइट पर आपको कई ऐसे लेख मिलेंगे
जिनसे आपको इस विषय के मूल सिद्धान्त
समझने में सुविधा होगी, और साथ
ही कइ गुण और तकनीक मिलेंगे जो
आपके लिए उपयोगी होंगे. |
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| उदाहरण
के लिये देखिये कमल फुआल (नेपाल)
द्वारा लिखा हुआ लेख जिसका शीर्षक
है, सुख
बांटना, PRA फैलाना, इसमे कई विषयों
की चर्चा की गयी है, जैसे "क्यों"
और "कैसे" PRA का उपयोग होना चाहिये. |
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बेन
फ्लेमिंग का विवरण देखिये, सम्मलन
क्रिया,जिसमे बहुत ही समझ से
कई उपयोगी तकनीकों की सूची बनाई
गयी है. |
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| साथ
ही देखिये समाज
सेवक बनना, जिसमें सभी ज़रूरी
गुणों की सूची दी गयी है. |
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इसके
साथ देखिये विचारों
का आदान-प्रदान वाला भाग, क्योंकि
उसमें कई ऐसे तकनीकों का विवरण
किया है, जो इस समीक्षा के दौर
में उपयोगी होंगे. |
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| अगर
आपके पास इन्टरनेट की सुविधा
है तो आप नीचे दिये गये लिन्क्स
और अन्य
प्रिष्ठों पर भी, इस साइट से जा
सकते हैं, जहां से आपको इस विषय
पर अधिक जानकारी मिल सकती है. |
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इस
विषय की चर्चा वाली अन्य साइटस
पर भी आप जा सकते हैं. |
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| इसी
विषय पर कई और लेख IDS (Institute of Development
Studies) ससेक्स,UK, से भी मिल सकते
हैं, जिनमें रोबेर्ट चेम्बर्स
द्वारा लेख भी हैं, जो कि इस विषय
के महारथी माने जाते हैं. |
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इसके
अलावा, अगर आप के पास किसी विद्यालय
के पुस्तकालय की सुविधा नही
है, तो भी अनेक सूत्र हैं जहां
से आपको यह जानकारी इन्टरनेट
से मिल सकती है. आपको खोज करनी
पडेगी. |
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किन्तु,
शायद सबसे अच्छा तरीका है.खुद
करना,अनुभव बांटना, और फिर करना
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| इसका
मतलब है, जिस तरह यहां बताया गया
है उस रीति से कार्य शुरु करना,
फिर अपने अनुभव अन्य समाज सेवकों
के साथ बांटना जो आप जैसा ही कर
रहे हों, और फिर नई सीख से फिर
कार्य शुरु कर देना. |
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अन्य
समाज सेवकों के साथ जब भी संभव
हो वर्क्शोपस और गोष्ठी आदि
में भाग लें. |
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| यद्यपि
आपको नेत्रित्व की भूमिका धारण
करनी है, खास कर जब आप लोगों को
साथ लेकर समाज के हालात का मानचित्र
बनाते हैं, या जब आप साधनों की
सूची की तैय्यारी करते हैं, पर
ध्यान रहे कि इन सब क्रियाओं
में आप सबको सहयोग देने के लिये
प्रेरित करें. |
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उनकी
ज़रूरतों और साधनों के विषय में
अपने विचार उन पर न थोपें. |
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| बहुत
ध्यान से एकमत और एकता की ओर (देखिये
एकता
के लिये संयोजन) प्रयत्न कीजिये
और खास ध्यान रहे कि आपके सभी
कार्य बिल्कुल साफ और बेदाग
हों. |
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समाज
के सद्स्यों को साफ तौर पर दिखाइये
कि उनके प्रयत्नों का फल (समाज
के हालात का मान-चित्र या साधन
सूची बनाना) उन्ही की मिली जुली
मेहनत का नतीजा है, किसी एक व्यक्ति
या गुट का निजी स्वार्थ नहीं. |
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| इस
विषय पर खोज करते समय, या अपने
तकनीक सुधारने की कोशिश में,
भूलिये मत कि समाजसेवकों की
हैन्ड्बुक,
इसी साइट पर उपलब्ध है. |
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समाज
सेवक बनने की तैय्यारी वाले
भाग देखिये. |
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