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मान
चित्र और विस्तृत सूची
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सबके
सहयोग से समाज की समीक्षा करना
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समाज
के सदस्यों के लिये नोटस
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समीक्षा
करने वाले समाज के सद्स्यों
के लिये कुछ खास बातें
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| मान
चित्र और विस्तृत सूची: |
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| इससे
पहले कि आप या समाज के सद्स्य
किसी दिशा में कोई ठोस कदम उठायें,
ज़रूरी है कि सबसे पहले आप सब मिल
कर एक सूची बनायें - सब सुविधाओं,
साधनों. और ज़रूरतों की, जिससे
मालूम होगा कि समाज को क्या क्या
चाहिये |
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समाज
के वर्तमान हालात का मान चित्र
बनाना एक अच्छी शुरुआत होगा. |
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| इसके
बाद, और इसीसे संबन्धित है सब
सुविधाओं की एक विस्तृत सूची
बनाना |
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यह
अति आवश्यक है कि यह मान चित्र
और सूची सभी सद्स्यों के सहयोग
से तैय्यार हो; सिर्फ़ अधिकारियों
द्वारा नही, सिर्फ़ पढे-लिखे लोगों
द्वारा नहीं, किसी खास जाति या
धर्म के लोगों द्वारा नहीं --
सभी सद्स्यों के सहयोग से. |
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| आपका
समाज सेवक इसमें आपकी मदद करेगा
-- ग्राम या वर्ग में सबकी पैदल
यात्रा संयोजन में जिसके बाद
आप मान चित्र बनायेंगे, और बैठक
बुलाने में जिसके दौरान सूची
बनेगी |
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समाज
सेवक को इस कार्य में आपकी मदद
की ज़रूरत होगी और आपसे निवेदन
है कि आप उसे पूरा सहयोग दें. |
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इसको सफल
करने के लिये आपको क्या करना
है?
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मान चित्र
बनाने के अवसर पर समय पर पंहुचें
और कोशिश करें कि सभी सद्स्य
इसमें भाग लें.
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| समाज
के सदस्यों के साथ आप भी पैदल
यात्रा में भाग लें. |
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उन
सभी सार्वजनिक साधनों की ओर
ध्यान खींचें, जिनकी सही भांति
से देख-भाल हो रही है, जैसे साफ-सुथरे
शौचालय, या नल जिनमें साफ पानी
आ रहा हो (ज़मीन पर पानी गिरा
न हो) , साफ़ सुथरे, रोशनीदार विद्यालय.
खेल के मैदान जिनकी अच्छी देख
भाल हो, अच्छी सड़कें बिना खड्डों
के, साफ-सुथरे बाज़ार आदि और ऐसी
अन्य सुविधायें |
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| साथ
ही उन सुविधायों की ओर भी ध्यान
करें जिन्हें मरम्मत, सुधार,
या बदलने की ज़रूरत है, और इनका
उल्लेख भी मान चित्र पर होना
चाहिये. |
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इस
प्रक्रिया में आपका मुख्य लक्ष्य
है कि मान चित्र पूर्ण और बिल्कुल
सही हो. |
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| विस्तृत
सूची बनाने के लिये भी आपको यही
सब करना पड़ॆगा. |
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आप
इसके लिये संयोजित बैठक में
भाग लीजिये और दूसरों को भी प्रेरित
कीजिये कि वह भी इसमें भाग लें. |
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| समाज
सेवक एवं सहायकों को पूरा सहयोग
दें. |
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सब
साधनों और ज़रूरतों की सूची बनायें. |
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| समाज
के सद्स्यों के साथ वाद-विवाद
में न पड़ें. |
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सिर्फ
ऐसा संयोजन करें कि आपके विचार
सुने जायें और साथ ही समाज के
सभी सद्स्यों के विचार भी सुने
जायें और उन पर गौर हो. |
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| अगर
किसी भी कारणवश कोई सद्स्य बोल
नही रहे हैं तो उन्हें अपने विचार
प्र्स्तुत करने के लिये प्रोत्साहित
करें. |
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उनकी
आवाज़ भी सभी तक पंहुचनी चाहिये. |
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| यह
समय है खोज करने का कि: "समाज
को प्रगति के लिये क्या चाहिये?" |
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यह
समय अपनी निजी ज़रूरतों को प्राथमिकता
देने का नही है. |
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| और
न ही यह समय अपने मित्रों, सगे-संबन्धियों,
या परिवार की ज़रूरतों को आगे
रखने का है |
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यह
अवसर है पूरी टीम (दल) के लिये,
और यहां टीम से तात्पर्य है -
पूरा समाज. |
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| अगर
आप पढ़ सकते हैं (और अगर आप यह
पढ़ रहे हैं तो निश्चित ही पढ सकते
हैं),तब कोशिश कीजिये कि आप
समाज को सिर्फ पढ़े-लिखे लोगों
की नज़र से न देखें. |
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ज़रा
सोचिये कि समाज किस नज़र से उनको
देखता है जो पढ़-लिख नही सकते. |
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| अगर
आप पढ़ नही सकते (और कोइ आपको
यह पढ़ कर सुना रहा है), तो थोड़ा
विचार कीजिये कि समाज के लिये
साक्षर होना कितना महत्वपूर्ण
है. |
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इस
अवस्रर को अपने धर्म. जाति, परिवार,
स्वभाषी या किसी ऐसे ही तंग दायरे
के फायदे के लिये न व्यर्थ करें.
इसका पूरे समाज के फायदे के लिये
उपयोग करें. |
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| इस
समीक्षा के अपेक्षित लाभ: |
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| मान
चित्र और विस्तृत सूची बनाने
के बाद क्या नतीजा होना चाहिये;
इस क्रिया के अन्त में क्या फल
निकलना चाहिये? |
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आपका
मान चित्र सब तरह से पूरा और सही
होना चाहिये. इसमें सभी साधनों
का उल्लेख होना चाहिये और उनसे
लाभ और खामियों का भी व्योरा
देना चाहिये. |
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| इस
तरह बनाई हुई सूची पूरी और सही
होगी, और उसमें सभी सुविधाओं,
साधनों, और कमज़ोरियों (जो वर्तमान
में हैं और भविष्य में हो सकती
हैं), का उल्लेख होगा, और साथ
ही समाज की प्रगति के लिये जो
अवसर आयें या ज़रूरतें हों उनका
भी उल्लेख होगा. |
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मान
चित्र और सूची, दोनों से ही साफ
दिखना चाहिये कि यह समाज के सब
सद्स्यों के सहयोग और योगदान
से बनी हैं, न कि किसी एक दल या
फिर किसी एक शक्तिशाली व्यक्ति
के विचारों का नतीजा हैं. |
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