| फिरभी
दूसरे तरिके है बाहरी संसाधनो
की बलवान करने वाली क्षमताओ
का उपयोग करने के लिये जैसे की
मुहम्मद और रस्सी की कहानी मे
बताया गया है. (देखिये कहानियां
सुनाना). अगर आप बाहरी दानीयो
को मना सकें के वह गुण शिक्षण,
प्रबंधन प्रशिक्षण और समाज सेवा
के कार्यो के लिये थोडी पूंजी
दे और समाज को अपने निर्माण के
साधन खुद प्राप्त करने मे मदद
दे तो आप समाज की आत्मनिर्भरता
तथा निरंतरता के प्रति योगदान
दे सकते है. |
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अगर
पैगम्बर ने भिखारी को केवल खाना
दिया होता तो वह उसको भिखारी
बनने की शिक्षा दे रहे होते; मगर
उसे सलाह और पूंजी देकर उन्होने
भिखारी की आत्मनिर्भर होने मे
मदद की. |